भास्कर न्यूज, भरगामा। जीतू दास।
शास्त्रीय संगीत के सुप्रसिद्ध गायक एवं स्वतंत्रता सेनानी परिमल यादव को पुण्य स्मृति दिवस पर ग्रामीण परिवेश के कलाकारों एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों ने बड़ी शिद्दत से याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर परिमल कला मंच के अध्यक्ष अजय अकेला ने विस्तार से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि परिमल बाबू ने सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में गुलामी के प्रतीक यूनियन जैक को उतारने के अभियान में 1943 में पटना के सचिवालय थाना द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए थे। वे सिर्फ एक शास्त्रीय संगीत के गायक नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के चर्चित सेनानी भी रहे हैं।
फिर सन 74 जेपी आंदोलन में भी उन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। इस प्रकार उनका संपूर्ण जीवन समाज, संगीत एवं कला को समर्पित रहा। वे जिंदगी के आखिरी क्षण तक समता मूलक समाज संरचना के लिए संघर्षरत रहे। उन्होंने बनारस घराने के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर से शास्त्रीय संगीत की दीक्षा प्राप्त की थी।
समाजसेवी गयानंद सिंह ने कहा परिमल बाबू एक ऐसे शास्त्रीय संगीत के शख्सियत थे, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत को राज- रजवाड़े के तहखानों से निकालकर जनता के बीच लाकर सार्वजनिक किया।
फोटो परिचय : श्रद्धा सुमन निवेदित करते समाजसेवी
सदानंद दास ने बताया परिमल बाबू प्रगतिशील विचारधारा के प्रवर्तक थे, उन्होंने अंधपरंपरा, छुआछूत के खिलाफ भी एक लंबा अभियान चलाया था। बताया उनके परिवार का इतिहास भी काफी गौरवशाली रहा है। सभा की अध्यक्षता महंत योगानंद दास ने की। स्मृति सभा में रेणु कोचिंग के छात्रों के अलावे वासुदेव ठाकुर, विद्यानंद यादव, दिलीप पासवान, महेंद्र मंडल, ललन पासवान, मुरली यादव, नंदन चौपाल, सुमन ठाकुर, भवेश ठाकुर,रामचंद्र मेहता, सदानंद मेहता, रुपेश चौपाल आदि ने अपना श्रद्धा -सुमन निवेदित किया।























