- नेपाल में राणाशाही हुकूमत खत्म होने के 75 वर्ष पूरे होने पर ‘सात सालको कथा’ का विमोचन।
- फणीश्वरनाथ रेणु के चर्चित रिपोर्ताज ‘नेपाली क्रान्ति-कथा’ का नेपाली अनुवाद है।
नजरिया न्यूज जोगबनी/अररिया। नेपाल में राणाशाही हुकूमत खत्म होने के 75 वर्ष पूरे होने पर अमर कथाशिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु के प्रसिद्ध हिंदी रिपोर्ताज ‘नेपाली क्रान्ति-कथा’ के नेपाली अनुवाद ‘सात सालको कथा’ का विमोचन शनिवार शाम नेपाल में किया गया। इसका अनुवाद चर्चित नेपाली लेखक तुलसी भट्टराई ने किया है।
आंचलिक उपन्यास विधा को मान दिलाने वाले अमर कथाशिल्पी रेणु की यह कृति अब नेपाली भाषा में भी लोग पढ़ सकेंगे।
इस पुसितक के अनुवादक तुलसी भट्टराई ने बताया कि 1950 में नेपाल के राणाशासन के विरुद्ध बिगुल फूंकते हुए रेणु जी स्वयं नेपाली क्रांति में शामिल हुए थे। इसके बाद 1951 में राणाशाही शासन का अंत हुआ था। उस समय हिन्दी वर्ष (विक्रम संवत) फाल्गुन 2007 था। इसलिए उन्होंने इस पुस्तक का नाम ‘सात सालको कथा’ रखा। वैसे भी नेपाल में 1951 की क्रांति को सात सालको क्रांति कहा जाता है। विराटनगर के राजनीतिशास्त्री व रेणु साहित्यप्रेमी भास्कर गौतम ने ‘सात सालको कथा’ का लोकार्पण करते हुए कहा कि नेपाल के लोग शायद ही रेणु को कभी भूल पाएंगे। नेपाली क्रांति में उनका योगदान अविस्मरणीय है। भारत-नेपाल सामाजिक सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि रेणु जी ने नेपाल के राणा शासन के विरूद्ध आंदोलन में न केवल शामिल हुए बल्कि वहां के युवाओं को हक के लिए आंदोलन के प्रति जागरूक किया।
नेपाल को केन्द्र में रखकर रेणु ने लिखे हैं कई रिपोर्ताजः अररिया के 90 वर्षीय वरिष्ठ साहित्यकार व नागार्जुन पुरस्कार से सम्मानित भोला पंडित कहते हैं कि नेपाली क्रांति कथा नेपाल में हुए आंदोलन का प्रामाणिक दस्तावेज है। विराटनगर के मिल-मजदूरों पर राणाशाही के सहयोग से पूंजीपतियों द्वारा ढाये जा रहे जुल्म का चित्रण करते हुये रेणु ने सरहद पार की सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक स्थिति का विवरण प्रस्तुत किया हैं।
क्या है ‘नेपाली क्रांति कथा’……..
‘नेपाली क्रांति कथा’ नेपाल की राणाशाही के खिलाफ लड़ी गई क्रांति की रोमांचक गाथा है। नेपाल के राणाशाही के अत्याचार और दमन के विरुद्ध जब वहां की जनता ने सशख संग्राम छेड़ दिया, तब रेणु उसमें एक सैनिक की हैसियत से शामिल हुए। रेणु जी ने अपने अनुभव के आधार पर ‘नेपाली क्रान्ति-कथा’ रिपोर्ताज लिखा। नेपाल को छोटी मां कहते थे रेणुः नेपाल से रेणु का क्या और कैसा रिश्ता रहा है, यह रेणु ने अपने संस्मरणात्मक लेख में इतनी सरसता के साथ लिखा है कि यह कहानी का रस प्रदान करती है। रेणु के बड़े बेटे व फारबिसगंज के पूर्व विधायक पद्मपराग राय बेणु कहते हैं कि रेणु नेपाल को अपनी सानो आमा (छोटी मां) कहते थे।























