नजरिया न्यूज अररिया। अररिया जिले हृदयपुर के मत्स्यपालकों को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ अररिया: जिले के हृदयपुर वार्ड नंबर 5 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बायोंफ्लक टेक का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर स्थानीय मत्स्यपालकों, कृषि एवं मत्स्यपालक अनिल कुमार ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह तकनीक मछली पालन के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति साबित हो सकती है। बायोंफ्लक टेक्नोलॉजी के माध्यम से कम पानी में अधिक उत्पादन संभव होगा, जिससे मत्स्यपालकों की आय में वृद्धि होगी। क्या है बायोंफ्लक तकनीक बायोंफ्लक तकनीक माइक्रोबियल सिस्टम पर आधारित एक जल प्रबंधन प्रणाली है, जिसमें पानी में मौजूद सूक्ष्मजीव जैविक कचरे को उपयोगी पोषक तत्वों में बदल देते हैं।
यह मछलियों को अतिरिक्त पोषण प्रदान करता है और पानी की गुणवत्ता को बनाए रखता है, जिससे मछली उत्पादन अधिक कुशल और लागत प्रभावी हो जाता है मत्स्यपालकों को कैसे मिलेगा फायदा कम जगह और कम पानी में अधिक उत्पादन – पारंपरिक मत्स्य पालन की तुलना में यह तकनीक कम जल उपयोग के साथ अधिक मछली उत्पादन सुनिश्चित करती है। कम लागत, अधिक मुनाफा – चूंकि इस प्रणाली में पानी बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए इसकी परिचालन लागत कम हो जाती है। स्वच्छ पर्यावरण और गुणवत्तापूर्ण मछली – यह प्रणाली मछलियों को पोषणयुक्त वातावरण प्रदान करती है, जिससे उनकी वृद्धि दर अधिक होती है और गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
कृषि और पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए वैकल्पिक आय स्रोत – यह तकनीक पारंपरिक किसानों और पशुपालकों के लिए एक अतिरिक्त व्यवसाय के रूप में उभर रही है। सरकार की भूमिका और योजनाएं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मत्स्यपालकों को बायोंफ्लक तकनीक अपनाने के लिए सब्सिडी, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। केंद्र सरकार इस योजना के माध्यम से देशभर में मछली उत्पादन को बढ़ाने और मत्स्यपालकों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
स्थानीय प्रशासन और मत्स्य विभाग का योगदान अररिया जिले में इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम और वित्तीय सहायता योजनाएं शुरू की गई हैं।
जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि इच्छुक मत्स्यपालकों को आवश्यक जानकारी और उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे इस नई तकनीक को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें मत्स्यपालकों की प्रतिक्रिया
बायोंफ्लक तकनीक को लेकर स्थानीय मत्स्यपालकों में उत्साह देखा जा रहा है। मत्स्यपालक अनिल कुमार का कहना है, “इस तकनीक के माध्यम से हम कम लागत में अधिक मछली उत्पादन कर सकते हैं, जिससे हमें ज्यादा मुनाफा होगा। सरकार की सहायता से हम इस व्यवसाय को और आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
” प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अररिया जिले में बायोंफ्लक तकनीक के शुभारंभ से स्थानीय मत्स्यपालकों को एक नई आर्थिक दिशा मिलेगी। यह तकनीक आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी होने के कारण भविष्य में मत्स्य पालन उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक सिद्ध होगी।























