=निर्मला सीतारमण ने शनिवार को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पूर्ण बजट पेश किया,
=इसका अनुमानित साइज 50.65 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है
= बीते वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने 47.16 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था
=ग्रामसभा बांगरखुर्द के सदस्यों ने पूछा 1950 में 50.65 करोड़ रुपये से कितना सोना खरीदा जा सकता था और आज कितना सोना खरीदा जा सकेगा
= दूसरा सवाल, विकास खंड क्षेत्र करौदीकलां में क्या किसी एससी वर्ग भारत सरकार की गारंटी पर दो करोड़ रुपये का उद्योग लगाने के लिए चयन होगा
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 5फरवरी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पूर्ण बजट पेश किया। इसका अनुमानित साइज 50.65 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है।यह जानकारी बांगरखुर्द ग्राम पंचायत के प्रधान योगेन्द्र प्रसाद राजेश विश्वकर्मा ने दी। वे अपने ग्राम पंचायत के बुद्धिजीवियों में बजट पर हो रही चर्चा की जानकारी दे रहे थे।
इससे पहले उन्होंने कहा कि बीते वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने 47.16 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। ग्रामसभा में नेहरू के काल से लेकर आजतक के बजट की भी चर्चा हो रही है।
कुछ बुद्धिजीवियों ने नेहरू काल के बजट पर चर्चा करते हुए सवाल कर रहे हैं कि उस समय आज के कुल बजट 50.65लाख करोड़ रुपये से कितना सोना खरीदा जा सकता था। कितना डालर खरीदा जा सकता है।
नेहरू के कार्यकाल में अधिक डालर क्यों खरीदा जा सकता था।
सुलतानपुर, उतर प्रदेश – ग्रामसभाओं में देश के बजट की चर्चा हो रही है। डालर, सोना, एसटी वर्ग को दो करोड़ का लोन, आंगनबाड़ी केंद्रों पर पालना घर के लिए बजट में प्रावधान की जानकारी लोग ले रहे हैं। मंहगाई दर और मनरेगा की मजदूरी दर तथा नेहरू और मोदी के काल में मंहगाई की भी तुलना बुद्धिजीवी वर्ग कर रहा है।
= योगेन्द्र प्रसाद राजेश विश्वकर्मा, प्रधान बांगरखुर्द, करौंदीक्लां, सुलतानपुर।
एसटी और महिला वर्ग में इस सवाल पर चर्चा हो रही है कि क्या भारत सरकार की गारंटी पर विकास खंड क्षेत्र करौदीकलां में किसी एसटी वर्ग को या महिला को उद्योग लगाने के लिए दो करोड़ रुपये मिलेगा। बेहद गरीब महिलाओं में आंगनबाड़ी केंद्रों से मिल रही सुविधाओं में वृद्धि के सवाल पूछे जा रहे हैं। पालनाघर से संबंधित सुविधाओं की जानकारी की मागी जा रही है। मनरेगा के मजदूरों ने मंहगाई की दर से मजदूरी नहीं बढ़ने पर चिंता जताई हैं। मजदूर वर्ग वर्ष 2000में अरहर दल का मूल्य बता रहा है। अरहर दाल के मूल्य में वृद्धि की दर से मनरेगा की मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहा है।























