वीरेंद्र चौहान, नजरिया न्यूज ब्यूरो, किशनगंज,16 जनवरी।
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड में आज 247 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। इस आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों को एनीमिया की समस्या, उसके समाधान, और स्वास्थ्य जागरूकता के महत्व से परिचित कराना था। कार्यक्रम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, और स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने इसे और प्रभावशाली बनाया।शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का यह प्रयास न केवल बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने का उद्देश्य रखता है, बल्कि जिले को एनीमिया मुक्त बनाने के अभियान को एक सशक्त दिशा देता है।
एनीमिया: एक गंभीर चुनौती
भारत में एनीमिया एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के बीच। यह समस्या तब होती है जब शरीर में आयरन और हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी, थकान, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। बच्चों में इसका प्रभाव केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनकी पढ़ाई और मानसिक विकास पर भी गहरा असर डालता है।
शिक्षक समाज के मार्गदर्शक होते हैं।-
सिविल सर्जन
किशनगंज के सिविल सर्जन डॉ. राजेश कुमार ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा,”शिक्षक समाज के मार्गदर्शक होते हैं। उनकी भूमिका न केवल बच्चों को शिक्षित करने में है, बल्कि उनके समग्र विकास में भी है। एनीमिया जैसी समस्या से निपटने के लिए शिक्षकों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से, वे बच्चों और उनके अभिभावकों को सही पोषण, आयरन युक्त आहार, और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में जानकारी देंगे। यह कदम किशनगंज जिले को एनीमिया मुक्त बनाने में निर्णायक साबित होगा।”
किशनगंज, बिहार -भारत में एनीमिया एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के बीच। यह समस्या तब होती है जब शरीर में आयरन और हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी, थकान, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं..
बच्चों के स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।
जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा,
“एनीमिया मुक्त भारत अभियान हमारे बच्चों के स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। यह पहल समाज के हर व्यक्ति को जोड़ने का आह्वान करती है। शिक्षकों का इसमें अहम योगदान होगा क्योंकि वे न केवल बच्चों तक, बल्कि उनके परिवारों तक भी स्वास्थ्य जागरूकता पहुंचा सकते हैं। मैं सभी शिक्षकों से अनुरोध करता हूं कि वे इस प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाएं और इसे अपने स्कूलों और समुदायों में लागू करें।”
प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषताएं
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को एनीमिया के लक्षण, कारण, और रोकथाम के उपायों की जानकारी दी गई।
आयरन फोलिक एसिड की गोलियों के महत्व पर चर्चा की गई।
संतुलित और पौष्टिक आहार के बारे में जानकारी दी गई।
नियमित स्वास्थ्य जांच और साफ-सफाई के महत्व पर जोर दिया गया।
टेढ़ागाछ प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि ने बताया कि स्कूलों में पोषण जागरूकता कार्यक्रम शुरू करना और बच्चों में स्वस्थ आदतों को प्रोत्साहित करना एनीमिया को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
शिक्षकों की भूमिका
प्रशिक्षण के बाद, शिक्षकों ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने इसे न केवल ज्ञानवर्धक, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए एक आवश्यक कदम बताया। शिक्षकों ने आश्वासन दिया कि वे इस जानकारी को न केवल बच्चों बल्कि उनके अभिभावकों तक भी पहुंचाएंगे।
समाज के लिए संदेश
स्वास्थ्य विभाग ने समाज के हर व्यक्ति, विशेष रूप से अभिभावकों, से अपील की कि वे बच्चों के खानपान और स्वास्थ्य पर ध्यान दें। हरी सब्जियां, फल, दालें, और आयरन युक्त भोजन को आहार का हिस्सा बनाएं। इसके साथ ही, बच्चों को नियमित रूप से आयरन फोलिक एसिड की गोलियां दिलवाएं और समय-समय पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण करवाएंसिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि टेढ़ागाछ में 247 शिक्षकों को प्रशिक्षण देना न केवल एनीमिया मुक्त भारत अभियान को गति देगा, बल्कि बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य में सुधार लाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। किशनगंज जिले में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग का यह समन्वित प्रयास पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणा है। यह पहल बच्चों के स्वस्थ और सशक्त भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है।























