-सर्दी के दिनों में बच्चों को होती है विशेष देखभाल की जरूरत
-कुछ खास बातों पर अमल से स्वस्थ व तंदुरूस्त रहेंगे बच्चे
अररिया, 12 नवंबर ।
जिले में ठंड का मौसम अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। सर्दियों के मौसम में शिशुओं की देखभाल उनके माता-पिता के लिये चुनौतीपूर्ण होता है। थोड़ी सी लापरवाही होने पर बच्चे ठंड की चपेट में आकर बीमार पड़ जाते हैं। इसलिये ठंड के मौसम में बच्चों का विशेष देखभाल जरूरी होता है। सर्दी के मौसम में हवा की नमी कम हो जाती है। इससे शिशु की त्वचा शुष्क हो जाती है। ऐसे में उनके लालन-पालन का विशेष ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। अगर मौसम के शुरुआती दौर से ही बच्चों की सेहत का समुचित ध्यान रखा जाये तो बच्चा पूरे मौसम के दौरान बिल्कूल स्वस्थ व तंदुरुस्त बना रह सकता है।
बच्चों के संक्रमित होने का रहता है खतरा –
सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने बताया कि बदलते मौसम का असर सबसे अधिक बच्चों पर पड़ता है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होता है। इसलिये उन्हें तरह-तरह की बीमारियों के संक्रमण का खतरा रहता है। ठंड के दिनों में अक्सर बच्चों में सांस लेने में तकलीफ, कफ-खांसी व सोते समय सांसों में घर-घराहट की आवाज जैसी शिकायत होती है। अगर शुरुआती दौर में ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो ये निमोनिया सहित अन्य गंभीर रोग का कारण बन सकता है। कुछ आसान उपायों को अपनाकर बच्चों का समुचित स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित किया जा सकता है।
ठंड के दिनों में बच्चों का मसाज है जरूरी –
ठंड के दिनों में बच्चों के लिये मसाज बहुत उपयोगी होता है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोइज ने बताया कि
मसाज बच्चों में ब्लड सुर्कलेशन को बढ़ाता है। शारीरिक कार्य प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करने, हड्डियों की मजबूती व बच्चों के सर्वांगीण विकास में इसका अहम रोल है। सर्दी के दिनों में हल्के गुनगुने बादाम, सरसो या ऑलिव ऑयल से बच्चों का मसाज जरूर करना चाहिये। इस दौरान बच्चे को हवा न लगे इसका ध्यान रखना जरूरी है। इसलिये बच्चे का पूरा कपड़ा एक साथ न उतारें। इससे बच्चे को ठंड नहीं लगेगी।
अधिक कपड़े न पहनायें, डायपर का उपयोग बेहतर-
बच्चों को ठंड से बचाने के लिये उनका सीना व पैर का ढका रहना जरूरी होता है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोइज ने बताया कि क बच्चे को सिर्फ एक या दो लेयर कपड़े ही पहनायें। ध्यान रहे कि कपड़े पूरी तरह साफ सुथरे हों। स्कीन एलर्जी से बचाने के लिये सीधे उलेन कपड़े पहनाने से परहेज करें। सबसे पहले कॉटन के अंडरगार्मेंट्स, उसके ऊपर टीशर्ट स्वेटर, पैरों में वुलेन ट्राउजर व पैरों में जुराबें पहनाना जरूरी होता है। पेशाब किये गीले कपड़े अगर समय पर न बदले जायें तो बच्चे को ठंड लगने व इंफेक्शन का खतरा होता है। इसलिये खासतौर पर रात में डायपर का इस्तेमाल बच्चे की सेहत के लिये जरूरी है। चार-पांच घंटों के अंतराल पर इससे बदलना जरूरी होता है।
हमेशा बच्चों को रखें गर्म, मां का ठंड से बचना जरूरी-
सर्दी के मौसम में जितना हो सके बच्चों को अपने पास रखें। कंगारू फीडिंग को प्राथमिकता दें। मां का स्पर्श बच्चों को गर्म रखता है। अगर बच्चे का हाथ पांव ज्यादा ठंड हो तो थोड़ी देर हीटर से रूम के तापमान को व्यवस्थित कर लें। इसके अलावा जरूरी है कि मां खुद भी ठंड से अपना बचाव करें। बच्चों को मां से ठंड लगने की पूरी संभावना होती है। ठंड में बाहर जाने से बचें। साथ ही ठंडे हाथों से बच्चों को छूने व पकड़ने से परहेज करना बच्चों की सेहत के लिहाज से जरूरी है।























