= अंग्रेजी शासन में अफसरों से पश्चिम बंगाल में पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों के संघर्ष को बयां करती पुस्तक को पढ़ते समय अचानक प्रकट हुआ उक्त एक शब्द
= Ravish kumar 0fficial, यूट्यूब पर आज लोड वीडियो में 18-19वीं शताब्दी की दास्तान को बताती पुस्तक को पढ़कर सुना रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार
दुर्केश बहादुर सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 21अक्टूबर।
पत्रकार और पत्रकारिता कभी नहीं हारेगी। 18वींऔर 19वीं शताब्दी में अंग्रजों के अफसरों से कोलकाता महानगर के पत्रकार और साहित्यकार लड़ते रहे। रविन्द्र नाथ टैगोर पत्रकारों और साहित्यकारों के बीच कैसे रहते थे। बंगाल से प्रकाशित अखबार में सरकार के खिलाफ कुछ भी प्रकाशित नहीं हो। इसके लिए उस समय भी अफसर तैनात रहते थे। खबरों को रोकने के लिए कानून भी बनाया गया फिर भी सरकार के खिलाफ खबर अखबार में प्रकाशित होती रही।इसकी जानकारी देती एक पुस्तक प्रकाशित हुई है।
इसी पुस्तक को कैमरे के सामने वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार आज पढ़ रहे है। यू ट्यूब पर उनका रविश कुमार आफिशियल के नाम से चैनल है।तब के अखबार अंग्रेज सरकार के अफसरों से नहीं डरते थे।






















