बीबीसी संवाददाता की चेतावनी: इस रिपोर्ट में कई ऐसी बातों का ज़िक्र है, जिनसे कुछ लोग विचलित हो सकते हैं
अनिल उपाध्याय, पूर्वांचल ब्यूरो, नजरिया न्यूज- 13मई।
प्रयागराज में एक ऐसी भयावाह त्रासदी हुई है, जिसमें दो परिवार तबाह हो गए। इसकी वजह से तीन लोगों की मौत हुई और सात लोगों को जेल जाना पड़ा है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में 18 मार्च को ऐसी घटना हुई, जिसने शहर के दो मध्यमवर्गीय मोहल्लों के बाशिंदों को हिलाकर रख दिया है।
प्रयागराज से बीबीसी संवाददाता गीता पांडेय की रिपोर्ट के मुताबिक:
शिवानी केसरवानी बताती हैं, ”उस दिन रात के 11 बजे का वक़्त रहा होगा, जब 60-70 लोगों ने हमारे घर पर हमला किया था।उन्होंने हमें बड़ी बेरहमी से मारना-पीटना शुरू कर दिया।
शिवानी कहती हैं कि ये हमलावर उनके भाई अंशु की पत्नी अंशिका के परिवार के सदस्य और रिश्तेदार थे।
हमले से कुछ घंटों पहले ही अंशिका का शव, अपनी ससुराल में फाँसी के फंदे से लटकता हुआ मिला था.
शिवानी और पुलिस का कहना है कि अंशिका की मौत ख़ुदकुशी की वजह से हुई थी। लेकिन, अंशिका के परिजन और पड़ोसियों का इल्ज़ाम है कि दहेज के लिए उनकी हत्या कर दी गई थी।
उल्लेखनीय है कि केसरवानी परिवार का लकड़ी का ख़ानदानी कारोबार है और वो संयुक्त परिवार में रहते हैं।उनके मकान के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में दुकान और गोदाम था। ऊपरी मंज़िलों पर केसरवानी परिवार रहता था।
मकान की हर मंज़िल पर एक बेडरूम था।एक साल पहले शादी होने के बाद से अंशु अपनी पत्नी के साथ इसके टॉप फ्लोर पर रह रहे थे। उनके माता-पिता इसी मकान की पहली मंज़िल पर और बहन शिवानी दूसरी मंज़िल पर रहा करते थे।
उस रात के बारे में शिवानी ने बीबीसी को बताया, ”अंशिका आम तौर पर रात को आठ बजे डिनर के लिए अपने बेडरूम से नीचे आया करती थी लेकिन, उस रात वो डिनर के लिए नीचे नहीं आई, तो हमें लगा कि हो सकता है कि वो सो गई हो।
शिवानी ने बताया कि जब उनके भाई रात दस बजे दुकान से घर लौटे, तो वो अपनी पत्नी को बुलाने के लिए कमरे में गए।
शिवानी बताती हैं, ”भइया ने कई बार दरवाज़ा खटखटाया।मोबाइल पर कॉल किया। लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला। तब उन्होंने कमरे के ऊपर बनी कांच की खिड़की तोड़कर दरवाज़ा खोला, तो अंशिका उन्हें फंदे से लटकती दिखी। भइया ज़ोर से चीखे।चीख सुनकर हम सब ऊपर की ओर भागे।
आंशिका और अंशु केसरवानी की शादी 2023में हुई थी
अंशु और उनके चाचा ने फ़ौरन अंशिका की मौत की ख़बर नज़दीकी पुलिस थाने को दी,जो उनके घर से आधे किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। उन्होंने अंशिका के परिवार को भी इस हादसे की ख़बर दे दी।
पुलिस का कहना है कि एक घंटे भी नहीं गुज़रे होंगे कि अंशिका के परिजन अपने दर्जनों रिश्तेदारों के साथ जमा हो गए और दोनों परिवारों के बीद भयंकर झगड़ा शुरू हो गया।
शिवानी ने अपने मोबाइल फ़ोन में हमें वो वीडियो दिखाए, जिसमें दोनों पक्षों के लोग एक दूसरे के ऊपर चीख़-चिल्ला रहे थे और लकड़ी के डंडों से मार-पीट कर रहे थे. वीडियो में दोनों पक्षों के बीच में एक पुलिसवाला भी खड़ा दिख रहा है, जो दोनों पक्षों को शांत कराने की नाकाम कोशिश कर रहा है।
जब अंशिका का शव घर से बाहर निकाला गया, तो इल्ज़ाम है कि उनके परिवार वालों ने घर को आग लगा दी।
मकान के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में रखी लकड़ी में आग भड़क उठी. शिवानी, उनके माता-पिता और चाची इस आग में फँस गए।
शिवानी और उनकी चाची तो दूसरी मंज़िल की खिड़की तोड़कर रेंगते हुए पड़ोस के मकान में चली गईं, जो उनके चाचा का था। लेकिन, शिवानी के माता-पिता इतने ख़ुशक़िस्मत नहीं थे।
फायर ब्रिगेड की टीम तीन घंटे की मशक़्क़त के बाद इस आग को बुझा सकी।उसके बाद जब वो रात के लगभग तीन बजे इमारत में दाख़िल हुए, तो उन्हें शिवानी के बुज़ुर्ग मां-बाप का जला हुआ शव मिला।
अपने आंसू पोछते हुए शिवानी बताती हैं, ”मेरी मां सीढ़ियों पर बैठी मिली।उन्हें बोरे में भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाया गया था।
पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में शिवानी ने अंशिका के परिवार के 12 सदस्यों के ख़िलाफ़ नामज़द रिपोर्ट की है. इसके अलावा 60-70 अज्ञात लोगों पर भी केस किया गया है।
एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि इस घटना के बाद अंशिका के पिता, उनके चाचा और उनके बेटों समेत कुल सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. वो सब अभी भी जेल में क़ैद हैं।
उनका कहना है कि अंशिका के पिता ने भी एक जवाबी शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने ‘अंशु, उनके मां-बाप और उनकी बहनों के ऊपर अपनी बेटी को दहेज के लिए तंग करने और उनका क़त्ल करने का इल्ज़ाम लगाया है।
शिवानी अपने परिवार के ऊपर लगे इल्ज़ामों को ग़लत बताती हैं।
हालांकि, वो ये मानती हैं कि उन्हें शादी के वक़्त अंशिका के परिवार से काफ़ी सामान मिला था।इसमें एक कार भी शामिल थी।
वो कहती हैं, ”उन्होंने जो कुछ दिया, अपनी बेटी को दिया. हमने उनसे कुछ नहीं मांगा था।
अपनी पत्नी की मौत वाली रात के बाद से अंशु घर नहीं लौटे हैं।
शिवानी कहती हैं, ”वो छुपकर ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं क्योंकि अंशिका के ज़्यादातर रिश्तेदार जेल से बाहर हैं। ऐसे में मेरे भाई को अपनी जान पर ख़तरा महसूस होता है।





















