अधिवक्ता की मृत्यु हो जाने पर अधिवक्ता कल्याण कोष को नामित उत्तराधिकारी को देना चाहिए 25 लाख रूपये-najarianews.in

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विकास प्रकाश (ब्यूरो प्रमुख)
नजरिया न्यूज, अररिया :

 

अधिवक्ता की मृत्यु हो जाने पर अधिवक्ता कल्याण कोष को नामित उत्तराधिकारी को देना चाहिए 25 लाख रूपये। इसी मुददे को लेकर फारबिसगंज निवासी सह जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विनय कुमार ठाकुर (वरीय अधिवक्ता) द्वारा अधिवक्ता कल्याण कोष ट्रस्टी कमिटी के अध्यक्ष को पत्र भेजते हुए अविलंब अधिवक्ता के मरनोपरान्त नामित उत्तराधिकारी को मिलने वाली राशि 7 लाख रूपये के स्थान पर अब 25 लाख रूपये करने की बात कही है।

अधिवक्ताओ के हितार्थ पत्र में दर्शाया गया है कि अधिवक्ताओ के कल्याण की योजना का शुभारंभ 1983 ई में राज्य सरकार के अधिनियम के अन्तर्गत प्रारंभ किया गया था। वही अधिवक्ताओ के लंबे संधर्ष के बाद अधिवक्ता कल्याण कोष अधिनियम 1983 अस्तित्व में आया था, जो वर्ष 1984-85 से लागू हुआ था। उक्त योजना में आय का मुख्य स्त्रोत अधिवक्ता कल्याण स्टाम्प जिसका मूल्य ढ़ाई रूपया था, जिसे प्रत्येक वकालतनामा पर लगाना अनिर्वाय किया गया वाद में प्रत्येक शपथ पत्र पर स्टाम्प को लगाना अनिवार्य कर दिया गया। उस समय 30 वर्षो तक प्रेक्टिस करने पर मृत्यु पश्चात 30 हजार रूपये नामित उत्तराधिकारी को देने का प्रावधान किया गया था। वाद में उक्त स्टाम्प का मूल्य पॉच रूपया कर दिया गया। साथ ही साथ अधिवक्ता निबंधन शुल्क भी उक्त कोष का प्रारंभिक आय स्त्रोत हो गया। तब अधिवक्ता के गंभीर बीमारी में प्रारंभिक इलाज पर 25 हजार रूपया तथा अधिकतम एक लाख रूपये तक चिकित्सा अनुदान दिया जाने लगा। साथ ही अधिवक्ता की मृत्यु के पश्चात उसके नामित उत्तराधिकारी को सात लाख रूपये अनुदान कर दी गई है तथा अल्प अवधि में मृत्यु की स्थिति में भी न्यूततम सवा दो लाख रूपये का प्रावधान कर दिया गया है, जो कि अधिवक्ता के मृत्यु के पश्चात उसके परिवार के लिए काफी लाभकारी सिद्ध हुआ।

पत्र में यह भी दर्शाया गया है कि वत्र्तमान समय में वेलफेयर स्टाम्प की कीमत 15 रूपये है, जो कि पिछले पॉच वर्षो से अधिक से समय से लागू है और प्रत्येक अधिवक्ता संध से पैरवी फॉर्म कमीशन जो पॉच प्रतिशत होता है उस से भी उक्त कोष की आय का स्त्रोत चौगुना हो जाता है, परन्तु अधिवक्ता को वही पुराना रकम दी जाती है जो कि न्याय पूर्ण नही है।
वरीय अधिवक्ता श्री ठाकुर ने कहा कि समय की मांग है कि जब उक्त कोष की आमदनी पहले से 4 गुना बढ़ गई है तो ऐसी परिस्थिति में नामित उत्तराधिकारी को 7 लाख रूपये के स्थान पर 25 लाख रूपया देने का प्रावधान किया जाय। अधिवक्ता के गंभीर बीमारी चिकित्सा अनुदान की राशि पॉच लाख रूपये तक हो।

30 वर्षो तक प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता जब स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होवें तो उसे उतनी ही रकम देने का प्रावधान किया जाय, ताकि वृद्धावस्था में आसानी से जीवन व्यतीत कर सकें, तभी कल्याणकारी योजना सफल होगी।

पत्र के माध्यम से वरीय अधिवक्ता श्री ठाकुर ने लिखा है कि जल्द योजना पर विचार होने से कई अंधिवक्ता इससे लाभान्वित हो सकेंगें।

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