चाइल्ड लाइन पूर्णिया को डीआईजी चौक पूर्णिया से मिली एक दो वर्षीय बच्ची-najarianews.in

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विकास कुमार (जिला प्रभारी)

नजरिया न्यूज़, पूर्णियाँ :

चाइल्ड लाइन पूर्णिया को डीआईजी चौक पूर्णिया से मिली एक दो वर्षीय बच्ची । बच्ची दोनों आंखों से अंधी है और इनका पेट भी फुला हुआ है इसी से प्रतीत होता है कि बच्ची को कोई बडी़ बीमारी होने की वजह से इनके माता पिता ने बच्ची को छोड़ दिया है।ज्ञात हो कि तमाम उपलब्धियां हासिल करने के बाद भी बेटियां दहेज के कारण जन्म जली बनने से उबर नहीं पाती है। दुर्भाग्य है कि कई बेटियों को जन्म लेने के बाद ही मां बाप से अलग होकर अनाथ आश्रम में पलना पड़ता है । हर वर्ष रेल की बोगियों में, फिर सड़कों के किनारे बेटियां फेंकी हुई मिल जाती है। भ्रूण जांच पर सख्ती के बाद भ्रूण हत्या घटी है। लेकिन नवजात बच्चियों का शव यदा-कदा मिलता ही रहता है ।

ऐसे मामलों में नाक भौं सिकोड़ना समाज अपने कर्तव्यों की इतिश्री तो कर लेता है लेकिन दहेज प्रथा रुक नहीं रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि दहेज के कारण ही कोई अपनी बच्ची को पैदा कर फेंक देने का जघन्य  अपराध करता है। अन्यथा अपनी बच्ची को किसी से फेंका ही नहीं जाएगा। आज बेटियां हर क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल कर रही है। लेकिन लगता है कि इतने के बावजूद लोगों की मानसिकता पूर्ण रूप से बदली नहीं है ।मंगलवार को शाम 7:00 बजे डीआईजी  चौक पर दो वर्ष की अंधी बच्ची रोड के किनारे लावरिश अवस्था में पड़ी हुई मिली है। इनके पास से एक झोला पड़ा हुआ मिला है। झोले से जन्म प्रमाण पत्र का पेपर मिला है और एक टीकाकरण का कागजात भी मिला है।इसमें जो पता है वह रानीपतरा, गौड़ा,  पोस्ट- मझुआ थाना मुफस्सिल है जिसमें बच्ची का नाम अंशु कुमारी  पिता विपीन महतो माता कंचन देवी अंकित है इसकी सूचना चाइल्डलाइन के टोल फ्री नंबर 1098 पर चाइल्डलाइन को दी गई चाइल्डलाइन के मयूरेश गौरव और खुशबू रानी ने मौके पर पहुंच कर सबसे पहले बच्ची को अपने कब्जे में लेकर चाइल्ड लाइन कार्यालय लाया। उसके बाद बच्ची के मिलने की सूचना बाल कल्याण समिति सदस्य सरिता कुमारी को दी गई। उनके निर्देशानुसार बच्ची को दत्तक ग्रहण संस्था में फिलहाल रखने को कहा गया है।मो शहजादा हसन ने बताया कि इससे पूर्व पिछले साल अक्टूबर में चाइल्ड लाइन ने स्थानीय नेवालाल चौक से 1 साल की बच्ची को बरामद किया था। जिसे भागलपुर अनाथ आश्रम में रखा गया था। 2013 में पूर्णिया जंक्शन से 15 माह की बच्ची को बरामद कर अनाथ आश्रम भेजा गया था। बच्चों की इस तरह की बरामदगी के संबंध में पूछे जाने पर चाइल्डलाइन के मो शहजादा हसन ने कहा आज भी बेटियों को बोझ समझा जाता है ।इस तरह के मामलों में दहेज प्रथा सबसे अधिक प्रभावी मानी जा रही है। बेटों की चाहत में बेटियों की संख्या घटती जा रही है और लोग  बहू लाने के लिए परेशान रहते हैं । बेटियों को फेंके जाने या कन्या भ्रूण हत्या के पीछे गरीबी अशिक्षा के अलावा दहेज प्रथा का सबसे बड़ा हाथ है बेटी बचाने के लिए दहेज को रोकना सबसे जरूरी है। झोले से मिले कागजात के अनुसार चाइल्ड लाइन द्वारा बच्चे के अभिभावक से सम्पर्क करने की कोशिश की जा रही है ताकि बच्ची को उसके अभिभावक से मिलाया जा सके। अभिभावक द्वारा इन्कार करने के बाद फिर बच्ची को गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जाऐगी। फिलहाल कल बच्ची को डाक्टर से दिखाया जाऐगा। ताकि बच्ची के बीमारी के बारे में पता लगाया जा सके। इस मौके पर चाइल्ड लाइन के मो शहजादा हसन, मयुरेश गौरव, मुकेश कुमार, खुश्बू रानी और अजीत कुमार मौजूद थे।

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