तीन तलाक बिल के विरोध, अररिया में महिलाओं का उत्तरा जन शैलाब-najaria news
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विकाश प्रकाश (व्यूरोै)
Najaria News@Araria

अररिया में हजारों मुस्लिम मीिलाओं ने तीन तलाक बिल का विरोध करते हुए मोन प्रदर्षन किया। दरअसल इन महिलाओं का कहना है कि सरकार की ओर से जो कानुन लाने की कोषिष की जा रही हैok2व षरिया कानुन के खिलाप है और सरकार इस कानुन के अन्तर्गत देष में काॅमन सिविल कोड को लागू करने कोसिस कर रही है। mediaवही जिला कांग्रेस कमिटी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष मासूम रेजा कहा कि धार्मिक विशयों से संबंधित निर्णय हमारे उलेमा उचित रूप से ले सकते है vpulतो सरकार को बील लाने की जरूरत नही, वत्र्तमान सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इन हथकंडो को अपना रही है।

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वही महिला का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही तीन तलाक को खत्म कर दिया और सुप्रीम कोर्ट के आदेष के अनुसार एक समय पर दिए गए तीन तलाक का कोई मतलब नही तो फिर सरकार इसके लिए कानुन कैसे ला सकती और कहा यदि मुस्लिम पर्सनल लाॅ में किसी तरह की छेड़छाड़ हुई तो उसे बर्दाष्त नही की जाएगी। Shaili Dignostic Centerप्रदर्षन कर रही मलिाओं ने सरकार से षरिया कानून में दखल नही देने और इस बिल को राज्यसभा में पास नही करने की मांग की।

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जन जागरण शक्ति संगठन ने किया आज के भारत बंध का समर्थन, मांग रखी दलित बहुजन आदिवासियों के न्याय और अधिकार की.
Posted on April 2, 2018
विकाश प्रकाश (व्यूरोै)
Najaria News@Araria
सोमवार, 2 अप्रैल, 2018 आज सामाजिक संगठनों, आंदोलनों और विपक्षीय राजनैतिक दलों द्वारा बुलाये गए सांझा भारत बंध का जन जागरण शक्ति संगठन (जे.जे.एस.एस.) ने किया समर्थन. ज्ञात हो कि यह बंद देश के सरवोच्च न्यायलय द्वारा अनुसूचित जाती एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989 को ख़तम करने की साज़िश के खिलाफ बुलाया गया था. इस बांध का जे.जे.एस.एस. पूर्ण रूप से और ज़ोरदार समर्थन करती है. बंध को सफल करने संगठन के चार जिलों – अररिया, कटिहार, वैशाली और सहरसा के लोग पहुचे अपने अपने इलाकों में आयोजित बड़े सामुयिक विरोधाभासी कार्यक्रमों में. इस में पहुची महिला सदस्यों ने राष्ट्रीय स्तरीय आंदोलनों में, दलित महिलाओं की ज्यादा भागीदारी, ज्यादा नेतृत्व की मांग रखी.
संगठन का लाल झंडा लिए, सर पे नीली पगड़ी और कंधे पर नीले गमछे लिए बड़े जोश से संगठन के मजदूर-किसान-छात्र-नौजवनों ने देश के संविधान के प्रधान रचयिता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर और हिन्दुस्तान की पहली जानीमानी महिला शिक्षिका, क्रांन्तिज्योती सावित्रीबाई फुले के विचारों को याद करते हुए कहीं रोड जाम किया, कहीं रेल रोका तो कहीं जुलुस निकाला.
2016 के एन.सी.आर.बी. के आंकड़ों के हिसाब से उत्तर प्रदेश के बाद बिहार में ही सब से ज्यादा अनुसूचित जाती/जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989 के तहत, कुल 5701 केस रजिस्टर हुए थे. और भी शर्मनाक बात यह है की सिर्फ राज्य में ही नहीं, देश भर में इस अधिनियम के तहत जितने अपराध के रिपोर्ट दर्ज हुए हैं, उस में अधिकाँश केस महिलाओं पे हिंसा और दमन के हैं. यह कानून देश के दलितों के लिए, शोषितों के लिए एक आवाज़ है, एक औज़ार है. ऐसे जनपक्षीय कानून पे लगातार सरकार और प्रशासन की तरफ से हमले हो रहे हैं. सरवोच्च न्यायलय की कई प्रकिर्याओं पे अराजकता के आरोप उठ रहे हैं आज कल.
बिहार जैसे राज्य में जहां आज भी जाती के नाम पे सामंती ताकतों का कब्ज़ा है ज़मीन और संसाधनों पे, जहां हर दिन अखबार में पढने को मिलता है की अंतरजातीय विवाह करने पर युवक युवतियों को समुदाय से बहिष्कृत या दण्डित किया गया, आज भी जहां चाय के दुकानों में कुछ जाती के लोगों को अपने चाय की गिलास खुद लेके आनी पढ़ती है छुआछुत के चलते, ऐसे में प्रशासन के इन हस्तक्षेपों से हमारे देश के दलित आदिवासी शोषित न अपनी आत्मरक्षा कर पायेंगे न समाज के ऊछे वर्णों और वर्गों के लोगों से बराबरी कर पायेंगे.
जे.जे.एस.एस. के महासचिव रंजित पासवान का कहना था की हम न्याय और समानता भरे समाज को रचने का प्रयास करते हैं. आज दलितों पे, आदिवासियों पे, मजदूरों पे, किसानों पे, अल्पसंख्यकों पे हर तरफ से हमला है. “हमारे बच्चों के मुह से निवाला, उनके सरकारी व्यवस्था में पढाई और स्वस्थ्य के बुनियादी अधिकार छीने जा रही है. ऐसे में देश के हर एक नागरिक की ज़िम्मेदारी बनती है की सत्ता की इस चाल को समझे और आज के धरने को सफल बनाए. धरने का ऐलान किसी ने भी किया हो, मुद्दा हम सब को छूता है.”
संगठन की युवा साथी, कटिहार की जैमंती कुमारी ने कहा की इस कानून के रहते भी गाँव के गरीब मजदूर परिवारों के लोगों को बहुत तरह की मुश्किलें होती थी, उनपे हुए हिंसा के खिलाफ केस दर्ज करवाने में, इन्साफ पाने में. अब यह कानून ही नहीं बचेगा, तो समाज में दबंगों का खुला राज चलेगा.
वैशाली के कार्यकर्त्ता अजय सहनी ने पातेपुर प्रखंड में रैली निकालते हुए घोषणा किये की दलित बहुजन मजदूर किसानो ने अपना खून-पसीना-आंसू बहा के इस देश की रचना की है. इन दलित साथियों के संघर्ष से बनी नीतियों को वापस लेना तो दूर की बात, उल्टा इन कानूनों के प्रावधानों को आन्दोलन के साथोयों संग चर्चा के और मज़बूत बनाना किसी भी सर्कार की नैतिक ज़िम्मेदारी है.
रैली की नेतृत्व कर रही सुधा देवी ने नारा उठाया “शिक्षित हो! संगठित हो! संघर्ष करो संघर्ष करो! ब्राह्मणवाद के साथ साथ पितृसत्ता को भी ख़तम करो!”
हमारी कुछ मुख्य मांगें:
१) अनुसूचित जाती एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम, 1989 में किये गए बदलाव को अविलम्ब वापस लिया जाए तथा दलित बहुजन समुदायों के अधिकारों के हित में और उनपे दमन के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाए तथा लागू किये जाएँ.
२) पदोन्नति में आरक्षण फिर से लागू किया जाए.
३) आरक्षित वर्ग के मेधावी छात्रों के चयन में कोटा की बाध्यता ख़तम किया जाए
४) पूरे देश भर में चल रहे अलग अलग विश्वविद्यालयों के दलित आदिवासी छात्र संगठनों के प्रतिरोध और मांगों की जल्द सुनवाई की जाए.
५) अनुसूचित जाती/जनजाती की बकाया छात्रवृत्ति राशि तुरंत छात्र छात्रों को दिलाई जाए, छात्रवृती में की गयी कटौती को वापस लिया जाए.
६) SC/ST/OBC के लिए आबादी के अनुरूप आरक्षण लागु किया जाए
७) भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद रावण, विस्थापन विरोधी कार्यकर्ता दामोदर तुरी जैसे कमज़ोर वर्ग की लड़ाई लड़ने वाले जिन लोगों को गलत या बिना बुनियाद पे जेल में रखा गया है, उन्हें न्याय दिलाया जाए.
कटिहार के चितोरिया पंचायत के सरपंच और जे.जे.एस.एस. के संयुक्त सचिव जीतेंद्र पासवान ने प्रतिरोध सभा से हमारा ध्यान आकर्षित करते हुए कहा की आज एक तरफ देश में पशु पक्षियों को बचाने के लिए कानून सख्त किये जा रहे हैं और दूसरी तरफ शोषित, दबे तबकों के इंसानों को बचाने वाले कानूनो को कमज़ोर किया जा रहा है. ऊपर से, इन समुदायों को आपस में लड़ाया जा रहा है. इस राजनीति को समझना होगा, इसके खिलाफ एकजुट होक आवाज़ उठानी होगी.
संगठन के सचिव शिवनारायण यादव ने उपस्थित सभी के तरफ से यह चेतावनी दी कि अगर इस कानून में लाये जा रहे बदलावों को तुरंत वापस नहीं लिया गया, दलित बहुजन आदिवासिओं के शिक्षा, आजीविका, स्वस्थ और आत्मसम्मान पे सरकार और प्रशासन ने ज़िम्मेदारी नहीं उठाई, तो इसका करारा जवाब उन्हें ‘सड़क से लेके संसद तक’ और ‘कोर्ट से लेकर वोट तक’ मिलेगा.
जय भीम. जय सावित्री. इन्किलाब जिंदाबाद.
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें शोहिनी से – 7319662732 पर.
सधन्यवाद
रणजीत (महासचिव), आशीष रंजन (सचिव), शिवनारायण (सचिव), जितेन (संयुक्त सचिव), ब्रह्मानंद (कोषाध्यक्ष), अजय, फूल कुमारी, आशा देवी, मो. अयूब, रीना देवी, दीपनारायण (सिकटी) संयुक्त सचिव, दीपनारायण कटिहार, (अध्यक्ष) , कृष्ण कुमार सिंह (उपाध्यक्ष), कामायनी स्वामी, सुधा देवी, राधा देवी, रम्भा देवी, मिथुन कुमार, मुन्ना कुमार, जैमंती कुमारी, डोली कुमारी, मिथुन कुमार, तन्मय, क्रिश्चम, अंजलि एवं जन जागरण शक्ति संगठन के सभी साथी

2 thoughts on “
तीन तलाक बिल के विरोध, अररिया में महिलाओं का उत्तरा जन शैलाब-najaria news”
    1. मोनिका जी हमारे नज़रिया न्यूज़ को लगातार पढने एवं कमेंट करने के लिए धन्यवाद |
      फ़िलहाल पूछ सकते है की आप कहा से है और अधिक जानकारी के लिये हमारे मोबाइल no. 7717708728 पर संपर्क करे |

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