सीतामढ़ी- घर-घर कालाजार रोगी खोज अभियान जारी, नहीं मिली एक भी रिपोर्ट पॉजिटिव।

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-जिले के डुमरा, बाजपट्टी, बोखड़ा, रून्नीसैदपुर और सुरसंड प्रखंड के 12 अति प्रभावित गाँवों में चल रहा अभियान

सीतामढ़ी। 4 अगस्त। जिले से कालाजार को जड़ से समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। इसी के तहत जिले के 5 प्रखंडों को कालाजार से मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग कालाजार रोगी खोज अभियान चला रही है। जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव की देख-रेख में आशा फैसिलेटेटर व आशा द्वारा कालाजार रोगियों की खोज हो रही है। डुमरा, बाजपट्टी, बोखड़ा, रून्नीसैदपुर और सुरसंड प्रखण्ड के 12 अति प्रभावित गाँवों में घर-घर कालाजार रोगी खोज जारी है। कार्य योजनानुसार कुल 17 हजार 781 घरों में 1 लाख 152 लोगों तक जाकर कालाजार/पीकेडीएल के लक्षण वाले सम्भावित रोगियों की खोज हो रही है। अभी तक 17 हजार 647 घरों में 95 हजार 890 लोगों तक पहुंचा जा चुका है। इसमें से सात लक्षण वाले लोगों की जांच की गई है, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव है। डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने बताया कि इस कार्य के लिए 75 आशा कार्यकर्ता और 14 आशा फेसिलिटेटर को लगाया गया है। उन्होंने बताया कि कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को जिले में वर्ष 2018 में ही प्राप्त कर लिया गया और अब जिले में हम शून्य कालाजार की ओर बढ़ रहे हैं।

रोगियों का होगा मुफ्त इलाज, मिलेगा अनुदान भी-

जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने बताया कि सम्भावित रोगियों की पहचान होने पर आशा द्वारा उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर रेफर किया जाना है। स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा जांच में कालाजार/पीकेडीएल की सम्पुष्टि होने पर मुफ्त इलाज किया जायेगा। साथ ही उन्हें क्रमशः 7100 / 4000 का आर्थिक अनुदान भी दिया जायेगा। इस हेतु सभी भीबीडीएस तथा केबीसी का जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव द्वारा अभिमुखीकरण भी किया गया। प्रखण्ड स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षण दिया गया है। आशा को इस निमित्त विशेष पंजी उपलब्ध कराया गया है। जिसमें घर के मुखिया तथा संभावित रोगी का ब्यौरा अंकित किया जा रहा है।

कालाजार के लक्षण-

रुक-रुक कर बुखार आना, भूख कम लगना, शरीर में पीलापन और वजन घटना, तिल्ली और लिवर का आकार बढ़ना, त्वचा-सूखी, पतली होना और बाल झड़ना कालाजार के मुख्य लक्षण हैं। इससे पीड़ित होने पर शरीर में तेजी से खून की कमी होने लगती है।

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