फारबिसगंजःबढ़ता संक्रमण, लाचार सरकार।-:najarianews.in

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मृत्युंजय सांडिल (संवाददाता)

नजरिया न्यूज़ फारबिसगंजःविशेषज्ञ और जानकार ने पहले हीं अंदेसा जता दिया था कि बिहार के स्वास्थ्य विभाग कारगर कदम उठाकर इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए इक्षाशक्ति दिखाएँ। लेकिन सरकार कोरोना से लड़ने के बजाय चुनाव की तैयारी में व्यस्त दिखी। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव डॉ कौशल किशोर कोरोना जांच के बाद संक्रमित पाए गए। विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की और बताया कि संक्रमित होने के तत्काल बाद वे होम आइसोलेशन में चले गए। स्वास्थ्य विभाग में कोरोना के नियंत्रण को लेकर किये जा रहे उपायों की निगरानी में डॉ. कौशल किशोर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी होने के साथ ही एक चिकित्सक भी हैं। वहीं, राज्य स्वास्थ्य समिति के वित्तीय सलाहकार केएल दास पिछले दिनों कोरोना संक्रमित हो गए थे, उनकी इलाज के दौरान मौत हो गयी। मौत की सूचना मिलने के बाद से समिति के अधिकारियों व कर्मियों में घबराहट है। समस्तीपुर के सिविल सर्जन डॉ आर आर झा भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए जो पटना एम्स में इलाजरत थे जहाँ उनकी मौत स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मनोबल तोड़ने वाला रहा। इससे कामकाज भी प्रभावित हुआ है। समिति कार्यालय को पूरी तरह से सेनेटाइज किया गया है। पिछले 10 दिनों में कोरोना के 15 हजार से भी ज्यादा के मामले आ चुके हैं। लेकिन टेस्ट की गति अभी भी दस हजार से ज्यादा नहीं हो पाया है। ये सही है कि बढ़ते संक्रमण में प्रवासी मजदूरों का योगदान है, लेकिन उस मजदूर का पुनः पलायन सरकार की नाकामी है। खुद मुख्यमंत्री सार्वजनिक स्थानों पर नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में मेडिकल स्टाफ, मेडिकल सामग्री, बेड और डॉक्टरों की कमी का रोना रो रहे बिहार सरकार का स्वास्थ्य विभाग क्या करेगा ये आसानी से समझ सकते हैं। पहले से समुचित व्यवस्था नहीं करना राज्य के प्राणघातक हुआ है? ये सवाल सुनकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कुछ भी नहीं बोलना मुनासिब समझा। असल में बिहार सरकार ने इस संकट को गंभीरता से नहीं लिया। वरिष्ठ पत्रकार विजय मिश्र कहते हैं ” बिहार सरकार ने कोरोना को हल्के में लिया जिसका दुष्परिणाम अब देखने को मिल रहा है”। विशेषज्ञ इस राय पर एकमत हैं कि अनलॉक करना बिहार में संक्रमण को बढाबा देने वाला फैसला रहा। अभी लॉकडाउन की स्थिति देखकर सहज समझ सकते हैं कि सरकार कितनी गंभीर है। इतने दिनों में लगभग चार लाख टेस्ट ये समझने के लिए पर्याप्त है कि स्वास्थ्य विभाग खुद कोरोनाग्रस्त है। अगले आठ दिन ये तय करेंगे की हालत काबू में कब तक आएंगे। जानकार कहते हैं कि बिहार कोरोना का हॉटस्पॉट बनने जा रहा है, बढ़ते संक्रमण इस बात की पुष्टि भी करती है। अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि इस महामारी से बचें कैसे? हैदराबाद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर संजीव कुमार कहते हैं “बिहार को सिर्फ सावधानी हीं बचा सकता है, लोग मास्क का उपयोग करें, घर से कम निकलें, साबुन हैंडवाश और सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें”।

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