शुद्ध पानी के नाम पर अधिकांश सप्लायर लोगों को सामान्य पानी ठंडा करके पिला रहे हैं….

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सुधाकर कुमार,ज़िला प्रभारी
नजरिया न्यूज़,सुपौल/बिहार

चिल्ड और शुद्ध पानी के नाम पर बेचा जाने वाला शुद्ध पानी एक लगभग 600 रुपया प्रति कैंपर प्रति माह मिलता है। अभी तक विभिन्न नामों से 600 रुपये प्रति कैंपर प्रति माह बेचा जा रहा है। गर्मियां शुरू होते ही बेशक पानी का काम करने वालों का धंधा चमक गया है।
लेकिन लोगों के स्वास्थ्य से होने वाले खिलवाड़ से सभी पल्ला झाड़ रहे हैं। ज़िलें में दर्जनों प्लाटों से करीब सेकड़ों कैंपर रोजाना सप्लाई की जाती है। जानकारी के अनुसार शुद्ध पानी के नाम पर अधिकांश सप्लायर लोगों को सामान्य पानी ठंडा करके पिला रहे हैं। कम गुणवत्ता के कारण जल जनित बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। लाइसेंस की बात करें तो दर्जनों पानी प्लांट देखा जा रहा है लेकिन प्लांट ने लाइसेंस नहीं लिया है और चोरी छीपी हजारों कैंपर पानी बेचा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की माने तो कैंपर द्वारा सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। खास बात तो ये है की पानी के इन केन और बोतलों पर न तो उसे तैयार करने की तिथि,न तो उसके उपयोग की तिथि,न ही बैच नंबर और न ही लाइसेंस नंबर अंकित है।
इनके पानी में जल जनित बीमारियां के बैक्टीरिया पाए जाते हैं। इसमें पीलिया, हैजा, डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती है।इन प्लांटों से पानी लेकर कैंपर द्वारा शहर में वाटर सप्लाई का कार्य किया जाता है। पानी के कैंपर दुकानदारों, व्यवसायिक संस्थानों के अलावा अब घरों में भी पहुंचने लगा है। सप्लायर सुबह कैंपर भरकर लाते हैं, शाम के समय कैन वापस ले जाते हैं। कई वाटर सप्लायर तो छोटे ट्रैक्टर टेम्पू या किसी वाहन में एक टंकी चिल्ड पानी की भरकर लाते हैं।
दुकान से कैन लेकर उनमें पानी भर दिया जाता है। घरों में भी पहुंचने लगे हैं कैंपर दुकानों और व्यवसायिक संस्थानों के साथ-साथ कुछ लोग शहर में आ रहे गंदे पानी के कारण घरों में भी कैंपर मंगवाने लगे हैं। सप्लायर का दावा है कि वे फिल्टर और चिल्ड वाटर सप्लाई करते हैं। इस कारण लोग उनका पानी लेना पसंद कर रहे हैं, परंतु स्वास्थ्य विभाग की माने तो इनके द्वारा सप्लाई हो रहा पानी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।और ये पानी मनुष्य के पीने योग्य नहीं है।
रोजाना लाखों लीटर पानी होते हैं सप्लाई। जानकारी के अनुसार ज़िलें में प्लांटों में से एक या दो प्लांट वाले को ही लाइसेंस है।जो पानी शुद्ध करते हैं। अन्य प्लांट वाले केवल पानी को चिल्ड कर बड़ी-बड़ी प्लास्टिक की टंकियों में डालकर उसे सप्लाई कर देते हैं।

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